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"It was a wonderful experience interacting with you and appreciate the way you have planned and executed the whole publication process within the agreed timelines.”
Subrat SaurabhAuthor of Kuch Woh Palयह पुस्तक मैं अपने पिता जी "श्री मानकी साह "और बड़े पिता जी "श्री जानकी साह "और चाचा जी "श्री नरसिंह साह" को समर्पित करती हूँ। यह पुस्तक उनके प्रति मेरा प्यार और सम्मान हैं। उनके ही आशीर्वाद और सहयोग से आज मैं इस मुकाम पर पहुँची हूँ। बिना उनके सहयोग और प्यार के आज मेरी कोई पहचान नहीं होती। जिस तरह लोग मुझे मेरे पापा के नाम से जानते हैं ,मेरा भी एक सपना हैं कि लोग मेरे पापा को मेरे नाम से जाने।
यह पुस्तक सिर्फ मेरे पापा को ही नहीं बल्कि दुनिया के सारे पिता को समर्पित हैं जो अपने बच्चों को निस्वार्थ भाव से उनके सारे सपने को पूरा करने के लिए खुद की भी फिक्र नहीं करते। एक पिता के प्यार को कुछ शब्दों में तो बयां नहीं कर सकते पर मैं दुनिया के सारे पिता के लिए दो शब्द बोलना चाहूँगी
" पिछले जन्म के कुछ अच्छे कर्म ही होंगे
तब जा कर आपका अंश बनी मैं
पापा आपसे ही तो ये पहचान मेरी
बिना आपके कुछ नहीं मैं "
:- प्रिया कुमारी
प्रिया कुमारी
लेखकी प्रिया कुमारी.....जमशेदपुर ( झारखण्ड )की निवासी हैं। ये इस पुस्तक की संकलनकर्ता और सह लिखिका हैं। इनका जन्म 19 अप्रैल को बिहार के छपरा जिला में हुआ हैं। इनके पिता जी का नाम श्री मानकी साह और माता श्रीमती मालती देवी हैं। ये नेताजी सुभाष महाविद्यालय की बिजनेस मैनेजमेंट की छात्रा हैं और ये अपने महाविद्यालय के NGO (रोट्रेक्ट क्लब) से जुड़ी हुई हैं। इन्होंने कई सारे संकलन में भाग लिया हैं और ये दो पुस्तकों को संकलन भी कर रही हैं। इनके लेखनी का सफर कक्षा 9 से शुरु हुआ और ये कविता एवं कहानियाँ के साथ चित्रकारी और स्केचिंग भी करती हैं। ये एक छात्रा होने के साथ साथ बच्चों को ट्यूशन भी देती हैं। ये एक पब्लिकेशन की एडिटर भी हैं। ये अपने अहसासों को शब्दों में पिरोना और जज्बातों को पन्नों पर उतरना बेहद पसंद करती हैं। इनके लिखें हुए लेख ये सिर्फ एक शब्द नहीं बल्कि यह उनकी कल्पना और अनुभव का सागर हैं।
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