इस पुस्तक में निम्नलिखित 17 कवियों की रचनाएं उनके जीवन परिचय सहित दी गई है। वि.सं. 1600-1800 के मध्य की जांभाणी साहित्य की सम्पूर्ण रचनाएं 47 साखी, 88 हरजस, 20 गीत, 470 कवित्त, छंद 480, 35 कथाएं एवं अन्य फुटकर रचनाएं इस पुस्तक में दी गई है:-
01. विल्हो जी (वि.सं.1589-1673)
02. दसुधीदास जी (वि.सं. की 17वीं सदी)
03. आनन्द जी (वि.सं. की 17वीं सदी)
04. नानिग जी (वि.सं. की 17वीं सदी)
05. लालो जी (वि.सं. की 17वीं सदी)
06. गोपाल जी (वि.सं. की 17वीं सदी)
07. हरीराम जी (वि.सं. की 17वीं सदी)
08. दुरगदास जी (वि.सं.1600-1680)
09. किशोर जी (वि.सं.1630-1730)
10. कालू जी (वि.सं.1630-1730)
11. केसो जी गोदारा (वि.सं.1630-1736)
12. सुरजन जी पुनियां (वि.सं.1640-1748)
13. मिठुदास जी (वि.सं.1650-1750)
14. माखन जी (वि.सं.1650-1750)
15. रामू जी खोड़ (वि.सं.1675-1700)
16. रूपो जी बैनिवाल (वि.सं.1680-1750)
17. दामो जी बैनिवाल (वि.सं.1680-1768)
18. अज्ञात कवि (वि.सं. की 17वीं सदी)
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