मैं अगर एक वाक्य में कविता और शायरी के विषय में कुछ कहना चाहूँ तो ये मैंने नहीं लिखी है बल्कि इन्होंने मुझे लिखा है।
कुछ लोग लिख-लिख कर जीते हैं और कुछ जी-जी कर लिखते हैं।मैं शायद उनमें से हूँ जो लिख -लिख कर जीते हैं ।
"ये भी गुज़र जाएगा" में जो भी कविताएं और शायरी हैं उनका मेरी पूर्व पुस्तक 'ये अजीब औरतें 'की तरह कोई एक विषय नहीं है,
इसमें "इश्क भी है और दुनियादारी भी है , खुद पे खुद की पहरेदारी भी है।"
इसकी यात्रा करते वक्त आपको हर कदम पर एक नया स्वाद और रहस्यमयता का आभास मिलेगा।चूंकि कविता स्वयं बोलती है अतः यदि मैं इसके विषय में ज्यादा बात करना करूँ तो अनुचित होगा।
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