एक सरोवर के किनारे। चार मृत भाई। और वे प्रश्न जो हर युग में गूंजते हैं।
जब पांडवों का वनवास अपने अंतिम दिनों में था, तब प्यास से व्याकुल चार शक्तिशाली योद्धाओं ने एक रहस्यमय सरोवर का पानी पिया। और तत्काल मृत्यु को प्राप्त हुए।
केवल युधिष्ठिर बचे। धर्मराज। सत्य के पुजारी।
सामने था एक यक्ष। असाधारण। रहस्यमय। शक्तिशाली।
और उसके प्रश्न—ऐसे प्रश्न जो केवल परीक्षा नहीं थे। वे जीवन के सबसे गहरे सत्यों की खोज थे।
"इस जगत में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?"
"सच्चा सुख कहाँ मिलता है?"
"मनुष्य कौन है?"
"धर्म का असली अर्थ क्या है?"
युधिष्ठिर ने एक-एक प्रश्न का उत्तर दिया। सरल शब्दों में। लेकिन इतनी गहराई से कि हजारों साल बाद भी वे उत्तर हर दिल को छू जाते हैं।
यह पुस्तक महाभारत के उस अमर प्रसंग को आज की पीढ़ी के लिए प्रस्तुत करती है। सरल भाषा में। आधुनिक संदर्भ में। व्यावहारिक व्याख्या में।
प्रत्येक अध्याय एक खोज है। एक सबक है। एक दर्पण है—जो आपको आपकी ही असलियत दिखाता है।
युधिष्ठिर के उत्तर बताते हैं—सच्चा ज्ञान क्या है, शांति कहाँ है, चरित्र कैसे बनता है। वे सिखाते हैं कि गुस्से पर कैसे जीत हासिल करें, लालच से कैसे बचें, मृत्यु के भय से कैसे मुक्त हों।
और अंत में—जब यक्ष ने युधिष्ठिर से कहा कि चार भाइयों में से एक को चुन लो, तब युधिष्ठिर ने जो फैसला लिया, वह धर्म की सबसे बड़ी परिभाषा बन गया।
यह केवल कहानी नहीं है। यह जीवन जीने का मार्गदर्शन है।
उन सभी के लिए जो पूछते हैं—मैं कौन हूँ? मुझे क्या करना चाहिए? सच्चा सुख कहाँ है?
युधिष्ठिर के पास उत्तर हैं। और वे उत्तर—आपकी प्रतीक्षा कर रहे हैं।
Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners
Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners