खोडमपुर—जंगल जहाँ हर पेड़, हर छाया और हर धुंध किसी रहस्य का गवाह है।
सात लोग जंगल में फँसते हैं। दो लौटते हैं। पाँच हमेशा के लिए वहीं रह जाते हैं।
यह कहानी जीवन की नहीं, बल्कि मौत, डर और अलौकिक रहस्यों की है।
हर पन्ना, हर शब्द आपको चेतावनी देगा—जंगल सिर्फ़ देखने वाला नहीं, महसूस करने वाला है।
कौन बचेगा, कौन खोडमपुर में हमेशा फँस जाएगा… यह रहस्य अब आपके सामने है।
सावधान रहें—खोडमपुर हमेशा देख रहा है।
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