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Divorce! Who is responsible? / तलाक़! जिम्मेदार कौन?

Author Name: Abdul Waheed | Format: Hardcover | Genre : Literature & Fiction | Other Details

तलाक को संसार में एक सबसे खराब काम माना गया है चाहे वह किसी धर्म का हो या समाज का हो क्योंकि इससे घर टूटता है, यदि बच्चे हो तो बच्चों की जिंदगी बर्बाद हो जाती है लेकिन जब कोई बनने की संभावना नहीं होती है तब तलाक एक मजबूरन प्रक्रिया होती है। तलाक आदमी भी दे सकता है और औरत भी, इस्लाम में औरत को तलाक देने का अधिकार खुला के रूप में होता है। बेहतर तो यही है कि विवाह के समय लड़की और लड़का को एक दूसरे को दिखा देना चाहिए और संभव हो सके तो बातचीत भी कर देना चाहिए जिससे जो बातें बाद में निकलती है वह आपस में स्पष्ट हो जाए। हालांकि इस्लाम में इसकी कोई मनाही नहीं है लेकिन समाज ही ऐसा है, यह विचार करना पड़ेगा। यह तय कर पाना बड़ा मुश्किल है कि तलाक के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? क्योंकि इसमें मियां बीवी के साथ-साथ लड़की और लड़के के परिवार की भी अच्छी खासी भूमिका होती है। यदि बच्चे हो तो इंसान तलाक देने से पहले, चाहे औरत हो या आदमी उसको अपने बच्चों के बारे में जरूर सोचना चाहिए यह सोचना चाहिए कि बच्चों के लिए मुझे उनकी खुशियां बर्बाद नहीं करनी है। इसी विषय पर उपलब्ध यह पुस्तक है कृपया इसे पढें यदि कोई अधिक जानकारी हो तो बताएं 

धन्यवाद

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अब्दुल वहीद

मेरा नाम अब्दुल वहीद है, मेरे पिता का नाम स्वर्गीय हाजी उबैदुर्रहमान है व माता का नाम जैबुन्निसा है। मैंने बचपन से ही वैज्ञानिक विचारधारा को पसंद किया है और शांत स्वभाव व पुस्तकों से लगाव रहा है। जिससे मेरी रोज जिज्ञासा रुचि निरंतर नए-नए खोजो की जानकारी में प्रयुक्त रहा है। मैं B.Sc करते समय पालीटेक्निक में सेलेक्शन हो गया था, लेकिन दुर्भाग्यवश अधूरा रह गया था क्योंकि पिता और भाई का सड़क दुघर्टना में सर्वगवास हो गया था ।

मेरे पिता जी की दो बातें जो, मेरे जीवन के लिए अत्यंत अनमोल है

 प्रथम– इमानदारी से कमाओ झूठ का सहारा मत लो,

दूसरा– अन्न की इज्जत करो और जितना खाना हो उतना ही लो।

 इसलिए घर की जिम्मेदारी, फिर बाद में विवाह हो जाने के कारण शिक्षा अधूरी रह गई । फिर भी हिम्मत नहीं हारा और आज आपके सामने मेरे विचारों के रूप में पुस्तक उपलब्ध है । मेरे लेख प्रसिद्ध पत्र-पत्रिकाओं में भी छप चुके हैं। यदि कोई जानकारी अधूरी रह गई हो तो कृपया जरुर अवगत कराये ।

 पुस्तक पढ़ने के लिए 

धन्यवाद, 

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