'जब तुम आओगे' इस पुस्तक में आपको जीवन की तरह ही प्रेम की तीन अवस्थाएँ -- आकर्षण, संयोग और वियोग को दिखाने का प्रयास किया है।
जब अधूरी पड़ी ख्वाहिशों में कोई शख्स छोड़ जाता है , तब वह दूसरा शख्स उन अधूरी ख्वाहिशो को अपनी कल्पनाओ में गढ़ता है और इसी चाहत में रहता है कि मैं ये सारी ख्वाहिशों तुम्हे सुनाऊँगा, जब तुम आओगे प्रेम में की गई अटखेलियाँ, जीवन के हर उस मोड़ पर याद आती है जब हम निराशा में घिरे हो। हमारे साथ चाहे कोई जितना भी प्यार करने वाला क्यों ही न हो, लेकिन ये आँखे उसके लिए ही मचलेगी, जिसके लिए दिल में अहसास, आँखों में ख्वाब और जिन्दगी में ख्वाहिशें बची रहती है। जिन्दगी के कुछ चीजे अधूरी रहना ही अच्छा है, जैसे मुलाकाते, बातें,यादें,ख्वाब, ख्वाहिशें और पहली मोहब्बत।
क्योंकि पहली मोहब्बत अधूरी होकर भी मुकम्मल होती है, क्योंकि वो जिन्दगी में हमारा कभी पीछा नहीं छोड़ती,लेकिन जिंदगी में ऐसे शख्स का इंतजार होना चाहिए,जो ख्वाब-ख्वाहिशें न दे, कसमें-वादे न दे। दे सिर्फ तो,वो मोहब्बत उसी मोहब्बत का इंतजार है जब तुम आओगे