कविता लिखना कभी कोई योजना नहीं थी — ये तो एक दिन यूँ ही हो गया, जैसे सुबह की चाय में गलती से इलायची पड़ जाए और उसका स्वाद अच्छा लगने लगे।
मैंने कविताएँ तब लिखनी शुरू कीं जब कुछ एह
कविता लिखना कभी कोई योजना नहीं थी — ये तो एक दिन यूँ ही हो गया, जैसे सुबह की चाय में गलती से इलायची पड़ जाए और उसका स्वाद अच्छा लगने लगे।
मैंने कविताएँ तब लिखनी शुरू कीं जब कुछ एह
तुम कौन हो? यह एक मात्र ऐसा प्रश्न है, जिसे प्रेम कहानी में किसी एक पक्ष से पूछा ही जाता हैं। केशव! आखिर तुम कौन हो? यूं तो अनजान हो, मगर जाने पहचाने से लगते हो। यूं तो कोई रिश्ता नहीं
दूनियाँ की परिधि समिति है समाज, बन्धिशे,कलंक, अफवाह, इत्यादि ,अक्सर सभी कहते है कि दूनियाँ प्रेम से चलती है इस सृष्टि को प्रेम से ही चलाया जा सकता है । लेकिन जब बात प्रेम - विवाह कि आ
यह मेरी पहली पुस्तक है, अगर आपकों लिखना पसंद है तो यह पुस्तक जरूर पढ़े। इस पुस्तक में आपको मिलेगा कि एक नया लेखक किस अंदाज में लिखता है। आज नहीं तो कल कभी ना कभी आप लोग भी अपनी रचनाएँ
नज़रिये - कुछ अनदेखे,अनकहे,अनजाने से...यह पुस्तक कई लेखकों का सामूहिक प्रयास है। इस संसार की खूबसूरती, जीवन में आने वाले उतार चड़ाव, आस पास घटित होने वाली घटनाएं, प्रेम, बेवफ़ाई और
अगर समस्याए गिनने बैठे तो समस्याओ की कमी नही होगी। किसी मोहल्ले मे अगर आप सभी की समस्या सुनने लगोगे तो निश्चित है कुछ देर के पश्चात आप को रोना भी आ जाएगा। इस संसार मे, हमारे देश, रा
'जब तुम आओगे' इस पुस्तक में आपको जीवन की तरह ही प्रेम की तीन अवस्थाएँ -- आकर्षण, संयोग और वियोग को दिखाने का प्रयास किया है।
जब अधूरी पड़ी ख्वाहिशों में कोई शख्स छोड़ जाता है , तब व
इस पुस्तक का नाम मैंने मिस रोज इसलिए रखा है क्योंकि स्कूल के समय में एक लड़का था जो मुझे बहुत ज्यादा पसंद करता था बहुत ही सीधा साधा भोला भाला था, मेरा डेस्कमेट व अच्छा दोस्त था।
तुम कौन हो? यह एक मात्र ऐसा प्रश्न है, जिसे प्रेम कहानी में किसी एक पक्ष से पूछा ही जाता हैं। केशव! आखिर तुम कौन हो? यूं तो अनजान हो, मगर जाने पहचाने से लगते हो। यूं तो कोई रिश्ता नह