हमारी ये पुस्तक काश बचपन लौट आता मेरा उम्मीद करती हूँ की आपको ये पुस्तक बहुत ही प्रसंद आने वाली है बचपन में हम सभी जब बड़ो को देखते हैं तो हमे उस वक्त ये ही लगता है की काश हम भी बड़े होते काश जल्दी से हम बड़े हो जाए और इस स्कूल जाने से हमे मुक्ति मिले पर जब हम बड़े हो जाते हैं तब शायद हम बचपन की असली कीमत का अंदाजा हो जाता है वो प्यारा बचपन वो प्यारी यादे वो कहानियां वो शरारतें वो अपनो के संग बिताए एक एक लम्हे हमे याद आते हैं काश हमे भी एक जादुई पेंसिल या कोई बचपन वाली प्यारी सी परी जो की कुछ क्षण के लिए सही हम वो अपने प्यारे से बचपन को फिर से जी पाते फिर तितलियों को पकड़ते संगी साथियों संग खूब मस्ती खूब मजाक खूब खेलते कूदते और काश!फिर से वो मीठी सी प्यारी सी चैन की नींद सो पाते कभी रूठते कभी मनाते आज वो समय ही नहीं है की हम चैन की नींद सो पाए और हम उन लम्हो को सोचकर कभी कभी उसमे खो भी जाते हैं और सोचते हैं काश एक दिन के लिए ही सही ये बचपन लौट आता न कोई चिंता न कोई दुख बस पढ़ाई ,मस्ती,शैतानियां ऐसा होता है बचपन ,हमने इस पुस्तक में 40 कवि कवियत्री की लिखी रचना,गीत को संग्रहित करकर आप सबके समक्ष प्रस्तुत करने का एक छोटा सा प्रयास किया है इन सबकी सुंदर रचना ,गीत उम्मीद करते हैं आप सबके दिल को छू जाएंगे मुझे तो ऐसा लगता है की जब आप इस पुस्तक को पढ़ रहे होंगे तो शायद आप भी कही अपने बचपन की सुंदर यादों में खो से जाएंगे और आप भी ये ही कहेंगे काश बचपन लौट आता मेरा ,अंत में मैं अपनी प्यारी बहन मुस्कान केसरी जी को धन्यवाद देना चाहती हूँ की उन्होंने मुझे ये सुअवसर प्रदान किया
बचपन के वो प्यारे लम्हे काश कोई फिर से लौटा दे
गुड्डे गुड़िया खेल खिलौने फिर से मुझको याद दिला दे