यह पुस्तक कुछ वरिष्ठ लेखकों की गण है। एक व्यक्ति लेखक तभी कहलाता है जब वह अपनी कलम का गुलाम हो जाये। लेखक की ज़िन्दगी हमेशा कलम और कागज के अधीन होती है। जिस प्रकार तीर और धनुष एक दूसरे के पूरक है उसी प्रकार कलम और कागज भी एक दूसरे के पूरक है और इन दो शस्त्रों का इस्तेमाल करके संसार के किसी भी कोने में हलचल मचाया जा सकती है। यह पुस्तक अंग्रेजी व हिंदी भाषा का प्रयोग करते हुए कल्पना और तथ्य पर आधारित है। पाठकों को इसमें हर प्रकार के लेख मिलेंगे । किताब इस उम्मीद पर प्रकाशित हुई है कि वह समाज में शांति, अहिंसा,अन्याय का बहिष्कार, काल्पनिक जीवन और प्रेरणा का स्रोत बने।