“मुसाफ़िर … अंजान राहों का” एक कविता संग्रह है, जिसमें डॉ. मुबारक खान की अपनी मेहनत, जज़्बा और अनुभवों से पली-पढ़ी ज़िंदगी के हर पहलू को उकेरा गया है। यह पुस्तक उन अनसुलझी भावनाओं, सामाजिक संघर्षों, राजनीतिक खींचतान और मोहब्बत के अनगिनत रंगों का सार प्रस्तुत करती है जो हमारे जीवन के हर मोड़ पर झलकते हैं। हर कविता में लेखक ने अपनी ईमानदारी और जीवन के उतार-चढ़ाव के साथ एक गहरी कहानी बुन दी है – चाहे वो दिल के दर्द हों या आशा की किरण, हर शब्द में अनुभव की गूंज सुनाई देती है।
इस संग्रह में न केवल व्यक्तिगत भावनाओं का प्रदर्शन है, बल्कि यह समाज, राजनीति और प्रेम की जटिलताओं को भी उजागर करता है। लेखक के शब्द हमें सोचने पर मजबूर करते हैं कि कैसे जीवन के छोटे-छोटे पलों में छिपा होता है बड़ा अर्थ, और कैसे हर अनुभव हमें एक नई राह की ओर ले जाता है। इस अनूठे सफ़र में, जब हम अपनी गलतियों और सफलताओं का सामना करते हैं, तो हमें याद आता है कि ज़िंदगी में हमेशा उम्मीद के दीये जलते रहते हैं।
“मुसाफ़िर … अंजान राहों का” उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो अपने सफ़र में सच्चाई और संघर्ष को अपनाना चाहते हैं। यह पुस्तक एक आम इंसान की ज़िंदगी के असली रंगों को दर्शाती है – बेइंतहा, अनसुलझी, और हमेशा नए अनुभवों से भरपूर।
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