जब इतिहास एक रात में आपका घर छीन ले, तो परिवार क्या करता है?
यह पुस्तक बसु रॉय चौधरी परिवार — जिसे बोस परिवार के नाम से जाना जाता है — की कहानी है, जिनकी जड़ें सदियों पुरानी हैं। पूर्वी बंगाल के फरीदपुर जिले के उलपुर गाँव में। हमारे पूर्वजों को मुगल सम्राट से जागीर मिली थी, और ब्रिटिश काल में वे उस क्षेत्र के प्रमुख जमींदार बने। उलपुर में उनकी भव्य जमींदारी बारी, काली मंदिर और विशाल भूसंपत्ति थी। फिर 1947 आया। विभाजन ने सब कुछ बदल दिया। बंगाली हिंदू होने के कारण परिवार को अपनी पुश्तैनी जमीन छोड़कर भारत आना पड़ा।
यह पुस्तक उस यात्रा का दस्तावेज़ है — उलपुर जमींदारी बारी के बचे हुए भवनों से लेकर दिल्ली के कश्मीरी गेट और चित्तरंजन पार्क में परिवार के पुनर्वास तक। इसमें ऐतिहासिक शोध, वंशावली, व्यक्तिगत यादें और एक निःस्वार्थ महिला की अविस्मरणीय कहानी भी शामिल है जिसने अकेले दम पर पूरे परिवार को दिल्ली में खड़ा किया।
भारतीय पारिवारिक इतिहास, बंगाल और विभाजन में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक अनमोल पुस्तक।
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