प्रेम बिना जीवन अपूर्ण कहलाता है। मनुष्य जन्मे से लेकर मृत्यु के प्रवास तक प्रेम रूपी धागे से जीवन के हर पहलु में किसी से न किसी से जुड़ता है। खासकर युवा अवस्था जहाँ उसे किसी साथी की - संग दिल की तलाश होती हैं, जहां से गुजरे बिना न जीवन पूरा माना जा सकता हैं, न आदमी प्रेम के बंधन से खुद को दूर रख पाता हैं। इस अवस्था में इंसान प्रेम की तलाश करता हैं, किसी से प्रेम की याचना तो किसी से सच्चा हमसफ़र बनने का निवेदन करता हैं, ऐसे समय या तो उसे मनचाहा प्रेम मिल जाता हैं या छूट जाता है (चाहे जो भी कारण हो)- ये अहसास उसके दिल में ऐसे कैद हो जाते हैं जिनसे न आदमी कभी छूट पाता हैं, न भुला पाता हैं, जीवन के अंत तक…
प्यार एक खुशनुमां अहसास हैं जो हर हाल में कुछ न कुछ सीखा जाता हैं, दिल पे निशां छोड़ जाता है .
समय के प्रवाह के साथ ये निःशब्द प्रेम-रूपी झरना हर प्रेमी-प्रेमिका के मन में अविरत बहते रहता है.
एक खुशनुमा अहसास के साथ....