यह तमाम विभिन्न मत- मतांतर, पंथ या संप्रदाय इत्यादि देखने में भले ही अलग-अलग दिखलाई देते हों, किन्तु सनातनी दृष्टिकोण से ये सब एकता के ही सूत्र में बंधे हुए हैं। क्योंकि इन सबका लक्ष्य ईश्वर प्राप्ति ही है। नदियां अलग-अलग क्यों न हो, लेकिन सबको अंत में समुद्र में ही मिलना है। इस प्रकार सनातन धर्म के अनुसार भिन्न - भिन्न लोगों का भिन्न - भिन्न प्रकार से एक ही ईश्वर को मानने या पूजने से कोई फर्क नहीं पड़ता है, क्योंकि ईश्वर तो सबका एक ही है, अपने विकास के स्तर के अनुसार लोग उसको चाहे जैसे मानें या जानें।सबको उसी एक ईश्वर को अपनी-अपनी रुचि अथवा विचार से पूजने का पूरा -पूरा अधिकार है, क्योंकि सब उसी एक ईश्वर की ओर ही तो चल रहें हैं।