डॉ. तारा सिंह की रचनायें सही मायने में, समाज का दर्पण हैं| जो पाठकों के दिलों पर ऐसी अमिट छाप छोड़ जाती है कि इनकी प्रत्येक रचना,पाठकों के लिए अविस्मरणीय बनकर रह जाती है|
‘तनहा सफ़र’ की मुख्य नायिका निर्मला, संपन्न परिवार में जन्मी एक युवती है, और वैसे ही धनी परिवार में उसका शादी होना निश्चित हुआ था, पर जाति-प्रथा की सड़ी-गली, जाल में उलझकर उसके माता-पिता सजातीय लड़के की खोज में उसकी शादी एक मध्यम वर्गीय परिवार में कर देते हैं| वहाँ वह किन-किन पीड़ाओं से होकर गुजरने के लिए बाध्य होती है? परिवार की रुढ़िवादी सोच, उसे कितना बेबस और लाचार बना देता है, इसी कथा पर आधारित, तनहा सफ़र, उपन्यास है| इसे पढ़ते समय कथानक के समस्त पात्र, किसी चलचित्र की भाँति पाठकों के आगे सजीव होकर बातें करने लगते हैं| साहित्य प्रेमियों को यह उपन्यास अवश्य पसंद आयेगा,ऐसा हमें विश्वास है|