"इश्क़" ये नाम सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते है। इस जहां मैं यक़ीनन हर किसी ने कभी न कभी किसी न किसी से तो इश्क़ किया ही होगा। ये नज़्में उन सब को सलाम हैं जिन्होंने इश्क़ करने की हिम्मत की। जैसा कि आप जानते ही है, कि हिम्मत वो चीज़ है जो कि अगर न हो तो बिलकुल न हो और अगर हो तो फिर अफ़रात पैमाने में होती है। ये किताब एक इंसान का सफर है जिसमें उसने मिलो का सफर तय किया है इश्क़ और उल्फत को संभालते संभालते।
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