वैसे कहा तो यह जाता हे की किसी स्त्री के मन में चल रहे भावो को पहचान पाना स्वयं भगवान के बस में भी नहीं परतुं जब आपके पास कलम की ताकत हो तो आप उस स्त्री मन में चल रहे भावो की कल्पना करने का प्रयास मात्र तो कर ही सकते हे बस इसी बात को ध्यान में रखते हुए मेने स्वयं में कुछ नया करने की चाहत के साथ इस कहानी में एक स्त्री की और से प्रेम प्रसंग को प्रस्तुत करने की कोशिश की हे, उम्मीद हे आप सभी को मेरा यह नया प्रयास जरूर पसंद आएगा।
यह कहानी एक रेल के सफर के दौरान शुरू हुए प्यार की कहानी हे जिसमे हर वक़्त कहानी मे कुछ ऐसे मोड़ आते चले गए जिससे सफर के दौरान ही एक रिश्ते की शुरुआत होती हे और और वही शुरुवात हसी मज़ाक के दौर से गुजरते हुए नई राहो की और मूड जाती हे। क्या इस रिश्ते में आपको कोई दिलचस्प कहानी मिलेगी?? इस प्रश्न का उत्तर आपको इस कहानी मे मिलेगा।