पोराणिक काल में योगी खाना एवं पानी पीना छोडकर भी योग के सहारे हजारों वर्षो तक कृशकाय शरीर लेकर भी जीवित रहते थे। रामायण के रचियता बाल्मीकी के बारे में तो प्रसिद्ध है कि वह योग करते करते अपने शरीर की सुध बुध भूलकर प्रभु भक्ति में इतने मुग्ध थे कि उन्हें अपने शरीर का भी भान नहीं रह गया था और दीमकों ने उनके शरीर को ढककर अपनी बामी ही बना ली थी। जिससे उनका नाम ही बाल्मीकी पड़ गया था।