कविता मानवीय दर्द की गहन अभिव्यक्ति है। कल्पना उसमें अर्घ्य का काम करती है तथा अनुभूतियाँ दंशों के सत्य का आभास कराती है। “मैं नीर भरी दुख की बदली” महादेवी वर्मा की चिर-परिचित पीड़ा है जो कहीं मीरा की पीर बनती है तो कहीं वियोगी की आह में अपनत्व खोजती है।
डॉ. दर्शनी प्रिय की कविताएँ इसी प्रकार का भाव-बोध लिए है। उनमें जहाँ प्रेम के प्रति समर्पण की जिजीविषा है, वहाँ समाज में व्याप्त अन्याय के लिए शस्त्र उठाने के प्रश्रय से भी वे पीछे नहीं रहतीं, किंतु उनमें शांति के गीत-सी आत्मा है; स्त्री के तन-मन को समझने के विभिन्न दृष्टिकोण हैँ।
कवयित्री में मर-मर कर जीवन जीने की कला है। वह इतिहास की दहलीज पर खड़ी होकर मूक स्वर को छंद देती हैं। उसमें नारी मुक्ति की चाहत है पर उच्छृंखलता नहीं। सृजन की अद्भुत दुनिया में वसंत का आगमन होता है तो दूसरी ओर शोषण और अभाव के विरुद्ध उनकी चिंताएँ राजनीति को भी गरियाने लगती है।
कुल मिलाकर उनमें एक आक्रोश की तड़पन है जिसमें यथार्थ का आवाह्न है। अच्छा होगा यदि वे उर्दू-फारसी के मोह से हटकर देशज अथवा भारतीय संस्कृति के बिंबों का प्रश्रय लेकर अपना काव्य-पथ प्रशस्त करें।
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Zinda hu main tujhme / ज़िंदा हूँ मैं तुझमें
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डॉ दर्शनी प्रिय
डॉ. दर्शनी प्रिय एक नवांकुरित लेखिका, कथाकार और एक कुशल अनुवादिका हैं। उनका जन्म व लालन पालन बिहार में हुआ। वहीं से उन्होंने प्राथमिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा ग्रहण की। तदंतर उच्च शिक्षा की प्राप्ति उन्हें दिल्ली खीच लाई। उन्होंने दो विषयों: हिंदी साहित्य और समाजिक कार्य में दिल्ली विश्वविद्यालय से एम ए की डिग्री प्राप्त की। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता सहित मानवाधिकार में भी डिप्लोमा हासिल किया है । आगे उन्होंने प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय - जेएनयू, दिल्ली से हिंदी-अंग्रेज़ी अनुवाद में एमफिल और पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। कई विदेशी भाषाएं मसलन स्पेनिश, फ्रेंच, जापानी पर उनका अधिकार है। इसके अतिरिक्त वे अंग्रेजी और हिंदी और भोजपुरी में भी दखल रखती है। उनका शैक्षणिक प्रदर्शन अत्यंत उत्कृष्ट रहा हैं। सन् 2009 से वे उत्कृष्ट उपन्यासों और चर्चित पुस्तकों के अनुवाद कार्य में रत है। अनुवाद के क्षेत्र में उनका योगदान सराहनीय है। प्रतिष्ठित प्रकाशनों और लेखकों के साथ काम करते हुए उन्होंने अनुवाद के क्षेत्र में अपना अप्रतिम योगदान दिया है। इसके अतिरिक्त उनके पास इग्नू जैसे प्रतिष्ठित विशवविद्यालय में अध्यापन का अनुभव भी रहा है। वे राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रिकाओं यथा दैनिक जागरण, राष्ट्रीय सहारा, हिन्दुस्तान, नवभारत टाईम्स और दिल्ली प्रेस की पत्रिकाओं में निरंतर लेखन कार्य कर रही है साथ है हिंदी की लब्धप्रतिष्ठित पत्रिकाओं में भी लगातार छप रही है। देश विदेश में संगोष्ठियों, परिचर्चाओं और परिसंवादों में साझेदारी का उनका गहरा अनुभव रहा है। उन्होंने कई साहितियक सभाओं को संबोधित भी किया है।
सम्प्रति: भारत सरकार में अनुवाद अधिकारी के पद पर कार्यरत
प्रकाशन: एक अनूदित पुस्तक "ख्वाहिशों के दरमियान" का प्रकाशन। प्रसिद्ध उपन्यास "अब्बू ने कहा था" का अंग्रेज़ी अनुवाद।