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Zindagi Mook Sabki Kahani Rahi / जिंदगी मूक सबकी कहानी रही

Author Name: Dr. Karuna Pande | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

दोस्तों सही हैं न ! कि हर ज़िंदगी अपनी कुछ कही और कुछ अनकही कहानी छोड़कर उस परम सत्य को आत्मसात कर लेती है अर्थात मौत के आगोश में जाती है। हम कितना भी जी ले पर फिर भी कुछ रह जाता है जिसे हम जी नहीं पाते। कुछ अलभ्य, अतृप्त और कुछ बची आकांक्षाएं छूट जाती हैं और वक्त की रफ़्तार में जीवन कितना आगे बढ़ चुका  होता है, हमें पता ही नहीं चलता। जब यह अहसास होता है तो हम बहुत आगे बढ़ चुके होते हैं और हम उस वक्त को लौटा नहीं पाते, तब ही हमें महसूस होता है कि वाकई सबकी जिन्दगी में कुछ रह जाता है जिसे हम जी नहीं पाते या कुछ अरमान होते हैं जिसे हम पूरा नहीं कर पाते। तब हम गुनगुना उठते है “जिन्दगी मूक सबकी कहानी रही”.........।

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डाॅ. करुणा पाण्डे

डॉ. करुणा पाण्डे


शिक्षा:
एम.ए. (हिंदी, राजनीति शास्त्र), एम. एड., पी.-एच.डी. (हिन्दी) 
संप्रति: 
बी. एड. विभाग में अध्यापन के बाद एच्छिक सेवानिवृत्ति और पूर्ण रूपेण समाजसेवा और साहित्य सेवा में संलग्न 

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