Share this book with your friends

Afsane Tere Panno Mei / अफसाने तेरे पन्नों में

Author Name: Madhusudan Singh | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

अफसाना तेरे पन्नों में' मधुसूदन सिंह का पहला काव्य-संग्रह है। इस संग्रह में गीत एवं कविता का शानदार मिश्रण हैl

“मधुसूदन सिंह के कविताओं एवं गीतों में भावनाओं एवं कल्पनाओं का अद्भुत प्रवाह है।जिसे पढ़कर ऐसा लगेगा जैसे उन पन्नो में दर्ज अफसाने मेरे ही हैं। 

मधुसूदन सिंह का जन्म 17 जनवरी 1973 को नाना घर गाँव खुदरांव जिला रोहतास में हुआ था। उनका बचपन ननिहाल में ही गुजरा। उनका पैतृक गाँव डिहरी जो कि बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित है। उनके पिता श्री सुरेंद्र सिंह किसान एवं उनकी माता श्रीमती रेवती देवी गृहिणी हैं। वे चार भाई,बहनों में दूसरी संतान हैं। मधुसूदन सिंह की पत्नी का नाम नीलम सिंह है।

Read More...

Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners

Ratings & Reviews

0 out of 5 ( ratings) | Write a review
Write your review for this book

Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners

Also Available On

मधुसूदन सिंह

मधुसूदन सिंह का जन्म 17 जनवरी 1973 को नाना के घर गाँव खुदरांव जिला रोहतास में हुआ था। उनका बचपन ननिहाल में ही गुजरा। उनका पैतृक गाँव डिहरी जो कि बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित है। उनके पिता श्री सुरेंद्र सिंह किसान एवं उनकी माता श्रीमती रेवती देवी गृहिणी हैं। वे चार भाई,बहनों में दूसरी संतान हैं। मधुसूदन सिंह की पत्नी का नाम नीलम सिंह है।
 

मधुसूदन सिंह अपनी प्रारम्भिक शिक्षा नाना जी के यहाँ प्राप्त करने के पश्चात सीता उच्च विद्यालय हरिहरगंज पलामू,झारखंड से दसवीं तथा मगध यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री हासिल की। चुकि परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं होने के कारण शुरुआती दिनों में उन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। जिसके कारण वे स्नातक की उपाधि हासिल करने के तुरन्त बाद पाँच वर्षों तक परिवार से दूर रोजगार की तलाश में दिल्ली में भटकते रहे और एक संस्थान में नौकरी करते हुए सम्पूर्ण उत्तर भारत का दौरा किया। वर्तमान में वे राँची स्थित एक निजी संस्थान में कार्यरत हैं। वे बचपन से ही नाट्यमंच से जुड़े रहे मगर जीवन की आपाधापी में वे साहित्य से दूर हो गए। कहते हैं जिसके नस नस में साहित्य समाया हो भला वह कबतक अपने आप को लेखनी से दूर रख पाता है। आखिरकार वे सन 2017 में वर्डप्रेस से जुड़े और वे आज करीब 500 सौ से ऊपर कविताएँ लिख चुके हैं।

Read More...

Achievements