जीवन,मृत्यु, क्रोध, लोभ, मद और अहंकार यानि ईगो आदि की विस्तृत विवेचना करने वाली इस पुस्तक में सागर दीप पाठक के अन्तर्मन के विचारों को पढ़ने के बाद तथा उसके सहज सरल और शान्त स्वभाव को देखकर निश्चित ही आप भी आश्चर्यचकित रह जायेंगे।
सागर दीप पाठक की लिखी पुस्तक -‘अज्ञात’को पढ़कर यदि आप उसका अनुपालन कर सके, अपने अन्तर्मन में झाँक सके, तो फिर सांसारिकता के प्रपंचों से विरक्ति और बड़े-बड़े प्रवचनों के सुनने के झंझटों की आवश्यकता से मुक्ति निश्चित हो जायेगी। ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है। (डॉ. दिनेश पाठक ‘शशि)