#National Writing Competition

Share this product with friends

Chaplusi Aur Anmol Zindagi / चापलूसी और अनमोल ज़िन्दगी चापलूसी नही मेहनत ही सफलता की कुॅंजी है / Chaplusi Nahi Mehnat Hi Saflta Ki Kunji Hain

Author Name: Harish Prajapati | Format: Paperback | Genre : Literature & Fiction | Other Details

इस पुस्तक के माध्यम से पाठको तक मैने आज समाज मे फैली चापलूसी को प्रस्तुत किया है। अपने भावो को शब्दो मे पिरोकर चापलूसी के बारे मे लिखा है। आजकल लोग मेहनत से लग्न से काम करने की ब्जाय चापलूसी का रास्ता पकड लेते है जल्दी कामयाबी पाने के लिए और चापलूसी के चक्कर मे ना जाने कितने लोगो का बुरा कर देते है, दूसरो को नीचा गिराकर बाॅस के सामने दूसरे की बुराई करके खुद को अच्छा साबित करने के लिए साथी स्टाफ को नौकरी से भी निकलवा देते है, क्योकि चापलूस को सिर्फ और सिर्फ अपने फायदे सुख सुविधा से मतलब होता है।

इस पुस्तक के माध्यम से सभी पाठको तक चापलूसी से होने वाले नुकसान, चापलूस की पहचान और जीवन के बारे मे अपने विचार प्रस्तुत किए है। ताकि सभी चापलूसी से खुद भी बचे रहे ओरो को भी दूर रहने की प्रेरणा दे। चापलूसी करके थोडी बहुत खुशी सुख सुविधा मिल जाएगी, परंतु ना जाने कितने लोगो के रोजगार परिवार की खुशियां सुख को हम खत्म कर देते है।

अतः मे आप सभी से एक विनती जरूर करूगां हम जहाॅं भी काम करे हमारी नौकरी कैसी भी हो किसी का बुरा सोचे बिना अच्छा कर दो। आपको परमात्मा खुदा बिना मांगे ही बहुत कुछ दे देगा। क्योकि बुरा करके आपको सिर्फ बुराई बदुआ ही मिलेगी। किसी का अच्छा करके देखो खुदा आपकी झोली कभी खुशियों सुख से खाली नही रहने देगा।

Read More...
Paperback
Paperback 150

Inclusive of all taxes

Delivery

Item is available at

Enter pincode for exact delivery dates

Also Available On

हरीश प्रजापति

हरीश प्रजापति का जन्म हरियाणा के रेवाडी जिले मे 1995 मे हुआ। वही के स्कूल मे इन्होने अपनी प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की। हरीश ने पहली बार छठी कक्षा मे समाज मे फैली बुराई कन्या भ्रण हत्या पर अपने विचार पर अपने विचार और लेख से सभी का दिल जीत लिया था। स्कूल के अध्यापको के मार्गदर्शन मे कुछ स्कूल स्मारिका मे अपने लेख लिखे। इन्होने मुंबई से इंजीनियरिंग की पदाई पूरी करने के बाद मुबई मे अपने नौकरी के केरियर की शुरूआत करी और फिर दिल्ली मे नौकरी करी। इन्होने नौकरी के दौरान मे जो चापलूसी चम्मचागिरी को देखा। उसे शब्दो की माला मे पिरोकर अपनी इस पहली किताब मे कलमबद्व किया। 

Read More...