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Mimansa / मीमांसा

Author Name: Pawan Kumar Nirala | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

मीमांसा कोई नाम नहीं है ! यह एक सोच की पीड़ा है | जिसे बहुत ही गहन-चिंतन और मनन के बाद लिखा गया है | जिसको मीमांसा से संबोधित किया गया है |

मीमांसा में नारी के हर रूप को दिखाया गया है | इसमें नारी के साथ होने वाली उन सभी घटनाओं को प्रदर्शित करने का कोशिश किया गया है, जिसे किसी भी रूप में, कभी भी सही नहीं माना जा सकता | इस पुस्तक को उन सभी नारी को समर्पित किया गया है, जो समाज की घृणा, तृष्णा से निकल करके, अपने अस्तित्व को कायम रखने की पुर-जोर कोशिश कर रही है | हर उस नारी को शब्दों से सम्मान देने की कोशशि है, जो अपने स्वभिमान के साथ-साथ, इस धरातल को भी उसकी पहचान बनाये रखने में मदद कर रही है |

कविताओं की एक ऐसी श्रृंखला ! जिसमें समाज के दायित्व को अपने शब्दों में बांध कर, एक काली परछाई को दिखने की कोशिश है | इसमें नारी की संवेदना, वेदना और उसके जीवन में क्रियान्वित, हर उस भावना को दिखाने का प्रयत्न किया गया है, जिसमें उसका जीवन एक कीड़ा की भांति देखा जाता है | इसमें समाज की कुव्यवस्था और नारी के संघर्स को, पन्नों पर, शब्दों में दिखने का प्रयत्न मात्र है | 

नारी एक निर्माण है ! जो धरातल में धंसी हुई नीब के समान है, जिसके उपर पूरा का पूरा निर्माण बुलंदी के साथ, अडिग रूप में खड़ा है |

 

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पवन कुमार निराला

पवन कुमार निराला का जन्म पटना ( बिहार ) में हुआ है, उनके पिता कोल इंडिया में अभियंता के पद पर कार्यरत थे, जिसके करण उनका बचपन बिहार और झारखंड दोनों ही राज्यों में बिता | बचपन से ही समाज के उस पहलू को देखते हुए गुजरा, जिसे समाज अनदेखा कर देता है | उन्होंने कोयले की खदानों के आस-पास की जिन्दगी को बहुत ही करीब से देखा है, जो उनके दिलो-दिमाग पर गहरी छाप छोड़ गया | उन शब्दों और दर्द को हम उनके किताब में देख सकते हैं |

निराला जी की शब्दों में पकड़ और लेखन में रूचि होने के कारण ही, आज वह अपनी किताब में समाज के उस दर्द को दिखा पा रहे हैं, जो उन्होंने महसूस किया |

निरला जी, वर्तमान समय में अपना व्यवसाय कर रहे हैं | वह अपने व्यवसाय को पटना और दिल्ली से संचलित करते हैं और दोनों ही स्थान पर उनका रहना-सहना है |

Author website - www. pawannirala.com

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