यह छंद काव्य संग्रह ‘‘रोम-रोम राम’’ छंद विधान की विभिन्न विधाओं का एक ऐसा सुमनगुच्छ है, जिसमें छंद विधान की उन विधाओं पर विशेष बल दिया गया है, जो वर्तमान में सामान्य रूप से प्रचलित हैं अथवा कुछ प्रचलित ऐसी विधाएँ जो प्राचीन हैं, किन्तु लुप्त प्रायः होती जा रही हैं, और रुचिकर हैं, जैसे-- अमीर खुसरों की काव्य विधा कहमुकरी हो अथवा सरसी छंद पर आधारित जोगीरा। रचनाकार द्वारा उक्त छंद संग्रह में मनहरण घनाक्षरी छंद, रूप घनाक्षरी, कुण्डलिया छंद, कुण्डलिनी छंद, माहिया छंद, हायकु, सेदोका (जापानी, छंद विधा) सायली छंद, कह मुकरी छंद, सवैया छंद, चैपाई छंद, दोहा छंद का समावेश करते हुये जीवन के विभिन्न आयामों पर चिंतन मनन करते हुये अपनी विचार तरंगो को अनंत सोपान चढ़ाते हुये गहन अध्ययन का परिचय दिया है। समसामयिक विषयों से लेकर जिजीविषा से सम्बन्धित सरोकार समेटे तथ्यो को उकेरते हुये छंद विधा मे पद्य रचकर अपनी काव्य प्रतिभा से हम सभी को सहजता से परिचित कराया है। इस छंद काव्य संग्रह में छंद की जिन विधाओं पर प्रयोग किया गया है, यथा सम्भव उन विधाओं का संक्षिप्त विधान भी प्रस्तुत किया गया है, जो पाठकों के लिए रुचिकर व नवोदितों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा।