“अपराधचक्र” का अर्थ है – देश के नियम और कानून के विपरीत कार्य करते हुए ऐसे भंवरजाल में फंस जाना जिसकी परिणति आर्थिक,मानसिक,शारीरिक और सामाजिक क्षति होती है |अपराधी को अंततः अपने गुनाहों की सजा देश के कानून के तहत भुगतनी पड़ती है | इसके बावजूद भी इंसान अपराध करने से बाज नहीं आता है |
वैसे तो इस विषय का दायरा बहुत व्यापक है पर हम यहाँ सिर्फ एक उदाहरण के तौर पर उन सत्तासीन नेताओं, अधिकारियों और कर्मचारियों का उदाहरण ले सकते हैं जो सत्ता प्राप्त होते ही सत्ता का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्ट आचरण में लिप्त हो जाते हैं और तब शुरू होता है भ्रष्टाचार का अपराधचक्र |यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें अपराधी एक बार फंस जाए तो उस दलदल से निकल पाना मुश्किल हो जाता है और वह धँसता ही चला जाता है | अंततः इसकी परिणति अपराधी को एक कष्टसाध्य न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है और घोर मानसिक, शारीरिक, आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है | साथ ही सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल हो जाती है और पारिवारिक जीवन तहस नहस हो जाता है | “अपराधचक्र” ऐसी ही कहानियों का संग्रह है जो हमें जीवन में आपराधिक कृत्यों से बचने की सीख देता है |पढिए यह शानदार कहानी संग्रह – “अपराधचक्र”
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