मैं बाबू भंडारी "हमनवा" बल्लारपुर महाराष्ट्र से " केशरी पब्लिकेशन" मुजफ्फरपुर से प्रकाशित होने वाली मेरी इस पुस्तक के बारे में पुस्तक का मैं एक परिचय देना चाहता हूं कि इस पुस्तक के लिए मैंने बहुत मेहनत की है और हर विषय पर मैंने रचनाएं लिखी है जैसे "कागज़ ही ज़िन्दगी है, इक ख़ुशी की चाहत में, ए खुदा के बन्दे, ए कलम तुझसे उल्फत, दुनिया, बेटी या दहेज,इस पहेली को, तेरा यहां कोई नहीं, आज नहीं तो कल, और न जाने कितनी ही और पूरी कोशिश की है मेरी ये आरज़ू थी कि मेरी ये पुस्तक जब भी छपेगी तकरीबन 100 रचनाएं हो लेकिन इस पुस्तक में 102 रचनाएं शामिल है।
एक बात मैं आप सभी को बताना चाहता हूं कि "हमनवा" का मतलब दोस्त मित्र होता है और मेरे सभी चाहने वालों का मैं दोस्त ही नहीं बल्कि भाई भी हूं और मेरी यह पुस्तक अब आप सभी सज्जनों के सामने प्रस्तुत है।
आप सभी को चाहने वाला आपका अपना
बाबू भंडारी "हमनवा