"बदलता भारतीय समाज" यह सांझा संकलन पुस्तक,में सभी लेखक एंव लेखिका नें समाज के बदलते दृश्य कों सरल शब्दों में समाज कें समक्ष प्रस्तुत किया हैं। प्रकृति ने जब मानव को बनाया तो उसे सोचने- समझने- महसूस करने की इंद्रियों के साथ-साथ एक प्रेम युक्त हृदय बनाया हैं , जिसमें कई प्रकार के भाव हैं । वर्तमान समाज के बदलते परिदृश्य को सामने लाना हमारा नैतिक कर्तव्य बनता है हमारी कविताएंँ समाज तक पहुंँचाना अत्यंत सरल हैं, शब्दों में गढ़ी गई मन के गूढ़ रहस्य को पहुंँचाने की हर संभव कोशिश की। ऐसी ही कुछ कविताएंँ आपके समक्ष प्रस्तुत है कविता संग्रह "बदलता भारतीय समाज " । यह पुस्तक समाज की जनजागृति के लिए काम में आए और लोगों के विचार सबके सामने आए।