Share this book with your friends

Bhav-Vibhor / भाव-विभोर

Author Name: Dr. Vijay | Format: Paperback | Genre : Poetry | Other Details

मनुष्य के जन्म के साथ और उसके जीवन के अंत तक मनुष्य का कईं भावोसे, रसोसें, रंगोंसे, भावनाओंसे परिचय होता हैं. कहीं तालमेल बैठता है तो कहीं टकराव, कहीं अलगाव, कहीं मिलाप. अलग अलग घटनायें और जीवन के विभिन्न अनुभवों में इन भावो के उच्चतर सीमा पर पहुंचने पर व्यक्ति/मानव जीवन के सभी रंगो का और रसोंका दर्शन करता हैं जो इन भाव-विभोर अवस्था को पार कर लेता है वो मानो जीवन के मर्म को कुछ हद तक समझ पाता हैं. हम हर भाव को किस अवस्था में जीते हैं, किस लेवल तक आनंद उठा सकते हैं, अपने पैशन या इंटरेस्ट या अपनी वीकनेस या स्ट्रेंथ को कितने स्तर तक ऊपर ले जा सकते है बस इसी कशमकश में  हम अपना जीवन जीते है और उस भाव-भावना की अवस्था अनुरूप हमारा जीवन सफल या असफल रूपमें विकसित होता जाता है. हर भाव का अपने सीमा के उच्चतम स्तर पर पहुंचना भाव-विभोर अवस्था कहलायेगा.इस अवस्था में वो उस रस या भाव का असली मर्म-भाव जान पायेगा इसीलिये इस अवस्था को पार करने के बाद ही इंसान के जीवन में परिवर्तन (ट्रांसफॉर्मेशन) की शुरुआत होती है. कुछ हादसे, घटनायें जीवन की दिशा बदल देती है ये भी उसीका एक स्वरुप है. अपनी सोच को अच्छी उड़ान देने पर वो शीर्ष स्तर पर पहुंच कर अच्छा ही परिणाम देगा जिससे आपका जीवन भी आनंद-विभोर हो जायेगा. 

इन परिवर्तनशाली, आविष्कारक, संवेदनशील मानवीय कल्पनाओंको  को और उसकी उच्चतम सीमाओं (भाव-विभोर अवस्था) को समर्पित

Read More...

Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners

Ratings & Reviews

0 out of 5 ( ratings) | Write a review
Write your review for this book

Sorry we are currently not available in your region. Alternatively you can purchase from our partners

Also Available On

साझा-संकलन- डॉ. विजय

कवि (संकलन): डॉ. विजयप्रकाशित पुस्तकें (4): सम्वेदनाओंको दस्तक, रंगभीनें मोती, प्रेम: निशब्द झरना, कटाक्ष
प्रकाशित कविता 'करे समाजका नव-निर्माण'- पुस्तक: 'संकल्प'
'राष्ट्रभाषा शिखर सम्मान 2022' -विश्व हिंदी रचनाकार मंच
'काव्य श्री सम्मान' - कलम बोलती है साहित्यिक समूह, सूरत गुजरात
'राष्ट्रभाषा-पंडित'पदवी, महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा महासभा, पुणे
साहित्यिक योगदान (कवितायें + लेख) : 45 (30 +15)
भारतीय हिंदी परिषद्, प्रयाग: आजीवन सदस्यता

प्रोफेसर (डॉ.) विजय जगदीश उपाध्ये

डेप्युटी डायरेक्टर, सेंटर ऑफ़ रिसर्च फॉर डेवलपमेंट 

असोसिएट प्रोफेसर, पारुल इंस्टिट्यूट ऑफ़ एप्लाइड साइंसेस

पारुल यूनिवर्सिटी, वड़ोदरा-३९१७६०, गुजरात 

सेल: 9768583096, 6355285047, 

ई-मेल: dr.vijaysemilo@gmail.com

Read More...

Achievements

+1 more
View All