देवी की वैवाहिक जिंदगी के 35 साल यातनाओं से भरी लंबी दास्तान है | बड़ी बेटी ने शादी से इनकार कर दिया , छोटी बेटी की शादी एक साल बाद ही टूट गई और वह घर आकर बैठ गई , वहीं बेटा ड्रग्स का आदी हो गया | इन सब का जिम्मेदार उसका पति दुर्जन था | देवी को लगता था इस बर्बादी की जिम्मेदार वह भी है | यदि वो इस गंवार इंसान से शादी करने की जल्दी न करती तो शायद ये दिन देखने न पड़ते | पर वो करती भी क्या ?उसके सामने कोई विकल्प भी नहीं था | पिता के पास दहेज देने की हैसियत नहीं थी तो अच्छा जीवन साथी कहाँ से मिलता ? खुद के पास इतनी पारखी नजर नहीं थी कि वह देखते ही दुर्जन को परख लेती | उसे क्या पता कि उसका होने वाला पति ऊपर से तो शरीफ़ पर अंदर से खतरनाक भेड़िया था , हमेशा उसके रक्त का प्यासा और उसे नोचने को तैयार | शराब पीने के बाद तो वह सचमुच एक राक्षस बन जाता था | उसके मानस पटल पर कितना जहर भरा था, कितनी कुंठा थी यह देवी कैसे जानती ? देवी का सबसे बड़ा दोष यही था कि वो दुर्जन के अत्याचार को सहन करती रही, उसे माफ करती रही और बली चढ़ा दिया उसने अपनी खुशियों का ........
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