इस पुस्तक के शीर्षक-रखने का एक मात्र उद्देश्य यह है कि जन जन तक यह बात पहुंचाना कि हर बच्चे अपनी मां बाप के लिए हमेशा छोटे ही रहते है... परंतु वे छोटे होते नहीं है। हर मां बाप को अपने बच्चों को उनके बचपने में ही स्पर्श और अस्पर्श में फर्क समझाए,उन्हें सभी अनजान व्यक्तियों से दूर रखे ,सिर्फ अनजान से ही नहीं उनके जानने वालो से भी। कभी किसी के भरोसे न छोड़े ...अगर बच्चे कुछ कहना चाहते हैं तो उनकी जरूर सुने उन्हें अनसुना ना करें, उनका साथ दें। हम लड़कियां बाहर तो लड़ लेते हैं, जीत लेते हैं पर घर में हार जाते हैं वजह घर वाले.... मां बाप द्वारा बच्चों को अनदेखा कर रिश्तेदारों को तवज्जू देता देख टूट जाते हैं। मेरा हर एक परिजनों से निवेदन है ....बच्चों को समझें,उनकी सुने और सही समय पर स्पर्श और आस्पर्श आदि चीजों के विषय से उन्हें परिपक्व बनायें।।