प्रस्तुत पोथी ” गंगा के किछोर सँ “ एक मैथिलीक काव्य संग्रह अछि।चुँकि हमर आवास पटना मे गंगा के किछोर मे अवस्थित अछि, जाहि ठाम सँ एहि पुस्तक के रचना कएल गेल । अस्तु एकर नाम “ गंगा के किछोर सँ “ राखब उचित बुझलहुँ।पोथी मे कुल १६६ गोट कविता संकलित अछि ।
साहित्यकार अपन साहित्य के रचना करबा काल मुख्य रूप सँ वातावरण,परिस्थिति, समय, पात्र सँ प्रभावित भ’ रचना करैत छथि।‘ गंगा के किछोर सँ ‘ काव्य संग्रह के रचना सेहो किछु एहि तरहक परिवेश मे भेल। हमर धर्म पत्नी संजुला कुमारी मिश्रा अल्प आयु मे चलि बैसलीह। हुनक वियोग हमर आत्मा के ततेक प्रभावित कएलक जकर प्रस्फुरन कविता रूपी सरिता स्वत:नि:सृत होमए लागल । उपर वर्णित कविता के चारि खण्ड मे विभाजित कएल गेल अछि ।
प्रथम खण्ड के नाम “ धर्म खण्ड “ राखल गेल अछि । एहि खण्ड मे मुख्य रूप सँ सनातन धर्म पर आधारित कविता के रचना भेल अछि। दोसर खण्ड के “ संस्मरण खण्ड “ के नाम सँ संम्बोधित कएल गेल । एहि खण्ड मे पत्नी के वियोग मे जे रचना कएल गेल छल तकरा सजाओल गेल । तेसर खण्ड के “ मर्म खण्ड “ कहब युक्ति संगत लागल । एहि खण्ड के अन्तर्गत ओहन कविता के राखल गेल अछि जे मार्मिक अछि।
पोथी के अंतिम खण्ड के “ कर्म खण्ड “ संज्ञा देल गेल अछि। जाहि मे कविता के माध्यम सँ कवि समाज के संदेश देमय चाहैत छथि जे कर्तव्य के प्रधान मानि जीवन यापन करी । नहिं कि भाग्य भरोसे बैसल रही ।
अंतत: हम कहि सकैत छी जे “ गंगा के किछोर सँ “ पोथी के सभ कविता रोचक, धार्मिक,हृदयविदारक,राष्ट्रीय,भावपूर्ण,संदेशात्मक,
कर्तव्यसूचक और प्रेरणादायक अछि ।