“जीवन संघर्ष “ एक आम इंसान के संघर्ष की कहानी है | जी हाँ , ये मेरी कहानी है | मेरे 63 वर्ष की जिंदगी का लेखा जोखा है जिसे मैंने शब्दों में पिरोया है | इस आत्म कथा को लिखने में मैंने पूरी ईमानदारी बरती है | JIVAN KE YOUWANPAR इस रचना का उद्येश्य सिर्फ इतना है की आप पढें और आनंद उठायें | हो सकता है मेरा जीवन संघर्ष आपको कोई प्रेरणा दे | इंसान इस जीवन में बहुत कुछ सीखता है | एक स्वयं के अनुभव से और दूसरा दूसरों के अनुभव से | स्वयं के अनुभव से सीखने के लिए एक जिंदगी कम है | यही वजह है की इंसान दूसरों के अनुभव से सीखता है | यह मेरे जीवन के अनुभव की कहानी है |
अपने जीवन के यौवन काल में जो लक्ष्य निर्धारित किये थे उन पर चलता रहा |मैं संकल्पशील था | या यूं कहें की मैं हठी था | गाँव की घोर गरीबी ,अभाव, कुंठा ,हीनता, और अपने चाचा के अत्याचार को सहते हुए भी मैंने अपने जीवन की दशा और दिशा खुद तय की | मैं कोई महान व्यक्ति नहीं बल्कि एक आम इंसान हूँ जिसके अंदर मानवीय कमियाँ है | पर इन कमियों के बावजूद भी मैंने अपने परिवार और देश के प्रति कर्तव्यों का निर्वहन किया और अपने जीवन को निरंतर प्रगतिशील और खुशहाल बनाया |