“काबिल” एक ऐसे नौजवान शिवा की कहानी है जो भारत के दूर-दराज गाँव में रहता है जहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, जिसका बचपन घोर गरीबी में बीतता है | उसके माता-पिता को अपना परिवार चलाने के लिए पशुओं के गोबर से निकले हुए अनाज को खाकर भी अपने बच्चों का पालन पोषण करना पड़ता है| स्कूल में भी वह शिक्षक के अति कठोर व्यवहार को बर्दास्त करते हुए आगे बढ़ता है| वहीं शिक्षक के व्यवहार से दुखी होकर कई छात्र पढ़ाई छोड़ देते हैं पर वह हिम्मत नहीं हारता और अंतत: 12 वीं की परीक्षा में अपने स्कूल में प्रथम आता है | वह शहर पढ़ने जाता है |पिता का सपना है कि उनका बेटा पढ़ लिख कर किसी कॉलेज में प्रोफेसर बने पर उसका सपना है की वह लॉ की पढ़ाई कर न्यायाधीश बने | शहर जाने से पहले उसके पिता हिदायतें देते हैं की वह ईमानदारी से अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे और अपना मन किसी लड़की के प्रेम-जाल में न भटकाए | पर वह शिवानी से प्यार कर बैठता है और उससे शादी करना चाहता है | क्या शिवा शिवानी से शादी कर पाएगा ? क्या शिवा लॉ की पढ़ाई कर न्यायाधीश बन पाएगा ? यह जानने के लिए पढ़ें लेखक का छठवाँ उपन्यास “काबिल”|
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