कर्म हमारे जीवन के सुख और दुख का जिम्मेदार हैं। हम या तो कुछ गलत करते हैं, जिससे हम इस जीवन में दुखी होते हैं या हम कुछ अच्छा करते हैं और हमे इनका सुख मिलता है। हम अपने आसपास की घटनाओं को कैसे स्वीकार करते हैं और कैसी प्रतिक्रिया करते हैं,सुख -दुख इस पर ही निर्भर करता है|जब कुछ गलत होता है, तो हम समझते है की हमरे द्वारा किया गया कोई कर्म सामने आया है, और जब बुरा होता है तब भी यही सोचते है। इससे पता चलता है की कर्म ही हमारे जीवन को आगे बढ़ाने मे मदद करता है। कर्म ही आखरी सच है, ओर यही आखरी सच हमे मान लेना चाहिए।