तिनका तिनका अल्फ़ाज़ों को समेटकर एक महफ़िल सजाई है ,
मैंने मुक्तक, कविता ,ग़ज़लों से एक हसीं दुनिया बनाई है |
कसर - कविता संग्रह रास , मेरे द्वारा लिखित दूसरी और पहली हिंदी पुस्तक है |
पिछले कुछ वर्षों से कवितायेँ, मुक्तक , नज़्म , शायरी व वक्तृता करने के पश्चात जो कच्चा अनुभव मैंने प्राप्त किया , तब मुझे एक बात समझ आयी की आज की दुनिया में जितने लोग हैं , उससे दस गुना ज़्यादा उनकी परेशानियां है | और इन परेशानियों की एक वजह उनका , अपने विचार न व्यक्त कर पाना भी है |
मुझे लगता है कि कवितायेँ व मुक्तक लिखना और पढ़ना , एक बहुत साधारण किन्तु प्रभावशाली क्रिया है | कवितायेँ इंसान को अपनी सोच का विस्तारण करने का मौका देती है | यह खुद में ही एक थेरेपी है | चाहे प्राचीन काल हो चाहे आधुनिक काल , कविताओं ने मनुष्य के जीवन की उस 'कसर' को पूरी करने की कोशिश करी है , जिसे वो अपने जीवन में 'कठिनाई' कहता है |
इसी श्रंखला में मेरा एक छोटा सा योगदान/कोशिश है कसर -कविता संग्रह रास |
आशा है पाठक के जीवन की कुछ कसर पूरी करने में यह "रास" सक्षम हो |