'षड यात्रा' विशुद्ध रुपें एक संस्मरणात्मक पोथी अछि ।मानवक जीवन सेहो एक प्रकार के यात्रा अछि,जाहि यात्रा के क्रम मे ओकरा बहुत किछु देखवा मे अवैत छैक। कहीं आनन्दक लहरि सॅं ओ सुख के अनुभव करैत अछि त' कहुखन ओकरा अतिशय दारुण दु:ख के घड़ी मे जाय लेल विवश होमय पड़ैत छैक।वस्तुत: प्राणी के सुख और दु:ख ओकर कर्म जनित फल के भोग थिक।एहि पर स्थापित प्रस्तुत पोथी मे छ: गोट संस्मरण पर आधारित यात्रा के वर्णन कएल गेल अछि। छबो यात्रा अत्यंत शिक्षाप्रद अछि। शक्ति पीठ के उत्पत्ति तथा अंतिम संस्कार के पश्चात मुक्ति के वास्ते गया मे पिंडदानक महत्व के देखाओल गेल अछि।ओहि प्रकारे धरणी पर कलियुग के समय मे कलियुग रहित क्षेत्र नैमिषारण्यक वर्णन निसंदेह रोमहर्षक भेल अछि।आधुनिक समय मे हवाई यात्रा सहज भ' गेल अछि मुदा जिनका पहिल वेर एहि पर चढबाक मौका भेटैत अछि त' ओकरा लेल वस्तुत: कौतूहल के विषय रहैत अछि ,जकर वर्णन एहि पाठ मे कएल गेल अछि। भारतवर्ष के तीर्थक देश कहल गेल अछि। एहि ठाम अनेको तीर्थ अछि,जतय तीर्थयात्री पहुॅंच अपन अंत:करण के स्वच्छ करैत छथि। ओहि मे सॅं वृन्दावन,मथुरा,बैष्णवदेवी के दर्शनक सांगोपांग वर्णन कएल गेल अछि। ताजमल के निर्माणक रहस्य के संग ओकर सुन्दरता के विषय मे वर्णन नीक भेल छथि।
यात्रा के पराव कवि अपन धर्म पत्नी के शव यात्रा सॅं करैत छथि। एहि पाठ में मुख्य रुपें पूर्व जन्म मे कयल गेल भगवती के आराधना के एहि जन्म मे निरुपण करबाक चेष्टा देवीभागवत मे प्रतिपादित सूत्र के आधार पर कएल गेल अछि।अंतत: ई पोथी यात्रा के माध्यमे जीवन के सच्चरित्र बनेबाक एक सफल प्रयास अछि।