*महासमर : अदृश्य युद्ध और भारत का उदय* एक सशक्त भू-राजनीतिक थ्रिलर और रणनीतिक फिक्शन है, जो आधुनिक विश्व में चल रहे उस अदृश्य युद्ध को उजागर करता है जो राष्ट्रों की दिशा और दशा तय करता है। इक्कीसवीं सदी में युद्ध अब सीमाओं और हथियारों तक सीमित नहीं रहा; यह डेटा, मुद्रा, तकनीक, मनोविज्ञान और नैरेटिव के माध्यम से लड़ा जा रहा है। 2047 के अमृतकाल की पृष्ठभूमि में यह उपन्यास भारत के सामने खड़े उन खतरों को प्रस्तुत करता है, जहाँ वैश्विक ‘डीप स्टेट’ की शक्तियाँ सामाजिक असंतोष, साइबर स्पेस और सूचना युद्ध के ज़रिये उसकी संप्रभुता को चुनौती देती हैं। कहानी के केंद्र में अजीत का चरित्र है, जो चाणक्य की आधुनिक रणनीतिक चेतना का प्रतीक है और बिना युद्ध घोषणा के नए युग के नियमों से संघर्ष करता है। महासमर केवल एक राजनीतिक उपन्यास नहीं, बल्कि यह प्रश्न उठाता है कि क्या भारत भविष्य में केवल एक सुपरपावर बनेगा या अपने मूल्यों के साथ विश्वगुरु के रूप में उभरेगा। यह पुस्तक राजनीति, रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए एक विचारोत्तेजक कृति है।