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Majboot Shuruaat / मजबूत शुरुआत भारतीय माता-पिता के लिए पहले दो वर्षों में खुशहाल बच्चे पालने की मार्गदर्शिका

Author Name: K K Sahu | Format: Paperback | Genre : Educational & Professional | Other Details

मज़बूत शुरुआत
यह किताब हर माँ-बाप के लिए है जो अपने छोटे बच्चे की परवरिश प्यार, समझ और अपनापन से करना चाहते हैं।

बच्चे के पहले दो साल ज़िंदगी की नींव रखते हैं — इन्हीं सालों में वह बोलना, महसूस करना, चलना और दुनिया को समझना सीखता है। इस किताब में माँ अंकिता और उसकी नन्ही बेटी परी की छोटी-छोटी कहानियों के ज़रिए दिखाया गया है कि रोज़मर्रा की स्थितियों में माँ-बाप कैसे अपने बच्चे की ज़रूरतों को पहचान सकते हैं और सही तरीके से उसकी मदद कर सकते हैं।

हर अध्याय एक नई “स्थिति” लेकर आता है — जैसे बच्चे की नींद की आदतें, प्यार और लगाव, सहानुभूति, मौसम के अनुसार देखभाल, भोजन की आदतें और कहानी-कविताओं से जुड़ाव। हर जगह कुछ आसान और उपयोगी सुझाव दिए गए हैं जो माता-पिता को रोज़मर्रा की चुनौतियों में काम आएँगे।

भाषा सीधी और दिल से निकली है — जैसे कोई अपने अनुभव अपने दोस्त से बाँट रहा हो।

डॉ. के. के. साहू का उद्देश्य है कि हर भारतीय माता-पिता अपने बच्चे की परवरिश को बोझ नहीं, बल्कि आनंद और सीख का सुंदर अनुभव मानें।

यह किताब आपको बताएगी कि कैसे छोटे-छोटे कदमों से एक मज़बूत शुरुआत की जा सकती है — जहाँ बच्चा सिर्फ़ बड़ा नहीं होता, बल्कि खुशहाल और संवेदनशील इंसान बनता है।

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के के साहु

डॉ. कृष्ण कुमार साहू, एल.एन. मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के वनस्पति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर रहे हैं। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षण, शोध और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन के कार्य में समर्पित किया। वे विश्वविद्यालय के विकास पदाधिकारी के रूप में भी कार्यरत रहे।

कई वर्षों तक प्रशासनिक अनुभव तथा भावनात्मक संवेदा रखने वाली उनकी शैली ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और समाज में गहरा प्रभाव डाला है। विज्ञान के क्षेत्र में उन्होंने 1980 के दशक में अपने अनुसंधान कार्यों द्वारा अल्गल साइटोलॉजी (Algal Cytology) में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी रुचि सदैव विज्ञान, शिक्षा और समाज के बीच सेतु बनाने में रही है।

हाल के वर्षों में, डॉ. साहू ने अपना ध्यान बाल मनोविज्ञान और प्रारंभिक शिक्षा की ओर केंद्रित किया है। उनका मानना है कि बच्चे के मन और शरीर का पोषण केवल एक स्नेह और समझ वाले वातावरण में ही संभव है।

उन्होंने अपने लंबे अनुभवों और अध्ययनों के माध्यम से भारतीय माता-पिता को जीवन के पहले दो वर्षों की देखभाल पर एक उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान किया है।

यह पुस्तक उनके मन और हृदय की गहराइयों से निकली एक सच्ची कोशिश है — जो माता-पिता को बच्चे की परवरिश की यात्रा में एक प्रेरणादायक साथी सिद्ध होगी।

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