भारत भूमि हमारी माँ है, हमारी मातृभूमि है,हमारी पहचान है। मातृभूमि के पवित्र आँचल की छांव में हम पले बढ़े और समृद्ध हुए। मातृभूमि के कारण हमारा ही अस्तित्व है। माँ समान मातृभूमि से हमें पेड़ पौधे,खेत,वन,पहाड़,नदियाँ,पशु पक्षी झरने आदि उपहार में मिले हैं। रहने के लिए उत्तम परिवेश और जीवन यापन के लिए आवश्यक संसाधन यह सब कुछ मातृभूमि से ही मिलता है।इसीलिए मातृभूमि को स्वर्ग से भी बढ़कर माना गया है। हमारा सौभाग्य कि भारतवर्ष की पावन धरा पर हमारा जन्म हुआ जहाँ असंख्य पुण्यात्माओं की शिक्षा,संस्कार, ज्ञान एवं सानिध्य में हम जीवन के उत्कर्ष की ओर अग्रसर हैं। जिस प्रकार मातृभूमि हमारा पालन-पोषण करती है उसी तरह हमें भी अपनी मातृभूमि के गौरव और सम्मान की रक्षा करनी चाहिए। यह प्रत्येक भारतवासी का कर्तव्य है। इतिहास साक्षी है तमाम प्राकृतिक आपदाओं और विदेशी आक्रमणों को झेलने के उपरांत भी मातृभूमि ने सभी विविधताओं को बिना किसी भेदभाव के संरक्षण प्रदान किया है। अतः हमें भी धर्म,संप्रदाय,पंथ,जाति और मज़हब से ऊपर उठकर मातृभूमि के उत्थान हेतु स्वयं को समर्पित करना चाहिए।