“माया के मोहपाश में मैं इतना बंध चुका था कि बाबूजी की बातें मुझे बेमानी लग रही थी |राधा की उदारता और माँ की ममता को मैं भावावेश में कही गई बातें मान रहा था | वहीं दूसरी ओर मेरा सीना अपमान की ज्वाला में धधक रहा था | बाबूजी ने मेरी पत्नी और बच्चों के सामने इतना अपमानित किया था की अब मैं एक पल भी उस घर में रहना नहीं चाहता था | घर के सभी लोग मुझे दुश्मन नजर आ रहे थे | मैंने अपना बचा-खुचा सामान बटोरा और टैक्सी में लाद कर माया के पास हमेशा के लिए आ गया |मोहब्बत की दुनिया बड़ी बेरहम है | यहाँ मंजिल कठिन यातनाओं से गुजरकर मिलती है | मोहब्बत कब किसी के लिए किस्मत का दरवाजा खोल दे या कब किसी को बर्बाद कर दे कह पाना मुश्किल है |इसे समझ पाना भी कठिन है ,बस समय के साथ ही सीख मिलती है | जिदगी की किताब में अनुभव के पन्ने जुडते रहते हैं | किसी मशहूर शायर ने कहा है ,“ये इश्क नहीं आसां , एक आग का दरिया है, और डूब के जाना है |”
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