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Mere Baad Bhi / मेरे बाद भी

Author Name: Pankaj Barnwal | Format: Paperback | Genre : Literature & Fiction | Other Details

क्या हर प्रेम का अर्थ साथ होना ही होता है?

रोनित (राम) और सीता—दो अलग-अलग संसारों में जीते हुए दो संवेदनशील मन।
एक शिकायत से शुरू हुआ संवाद कब आत्मिक निकटता में बदल जाता है, यह उन्हें भी पता नहीं चलता।
दूरी है, जिम्मेदारियाँ हैं, समाज की सीमाएँ हैं—
फिर भी एक ऐसा भाव है, जो बिना अधिकार माँगे, बिना वादों के, चुपचाप जीवित रहता है।

यह उपन्यास उस प्रेम की कहानी है
जो मिलन से अधिक समझ में विश्वास करता है,
जो पाने से पहले सम्मान करना सिखाता है,
और जो अंत में एक कठिन प्रश्न छोड़ जाता है—

क्या सच्चा प्रेम वही है जो साथ रहे,
या वही जो दूर रहकर भी किसी की भलाई चाहे?

यह कहानी सिर्फ़ प्रेम की नहीं,
मनुष्य बने रहने की एक शांत, गहरी यात्रा है।

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milindsaxena9

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पंकज बरनवाल

पंकज बरनवाल एक संवेदनशील चिंतक, समाज के प्रति प्रतिबद्ध कर्मयोगी तथा बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी लेखक हैं। उन्होंने प्रतिष्ठित विधि शिक्षण संस्थान, विधि संकाय, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (वाराणसी) से विधि में स्नातक और मध्य प्रदेश के जेवियर इंस्टीट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, जबलपुर से प्रबंधन में स्नातकोत्तर (एम.बी.ए.)  की शिक्षा प्राप्त की है l जिससे उनके व्यक्तित्व में विधि और प्रबंधन—दोनों का संतुलित एवं व्यावहारिक समन्वय दिखता है।

अपने पेशेवर जीवन में पंकज बरनवाल सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय हैं। उन्हें समुदाय विकास के क्षेत्र में समृद्ध एवं विविध अनुभव प्राप्त है। उन्होंने भारत की शासन व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र के सहयोग से अनेक जटिल सामाजिक समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी कार्यशैली में संवाद, समन्वय, नीति-समझ और जमीनी यथार्थ का गहन ज्ञान स्पष्ट रूप से झलकता है।

सामुदायिक समस्याओं के समाधान, परियोजना प्रबंधन तथा संगठनात्मक विकास जैसे विषयों में उनकी दक्षता उन्हें एक प्रभावी सामाजिक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित करती है। वे समाज के वंचित और हाशिये पर खड़े वर्गों की आवाज़ को व्यवस्था तक पहुँचाने में निरंतर सक्रिय रहे हैं।

साहित्य और प्रकृति के प्रति उनका गहरा अनुराग उनके व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। पक्षी अवलोकन (बर्ड वॉचिंग) उनके लिए केवल एक शौक नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ आत्मीय संवाद का माध्यम है। साथ ही, हिन्दी साहित्य—विशेष रूप से उपन्यास पढ़ना उन्हें विचार, संवेदना और सृजनात्मक ऊर्जा प्रदान करता है, जिसका प्रभाव उनके लेखन और सामाजिक दृष्टिकोण में स्पष्ट दिखाई देता है।

पंकज बरनवाल का लेखन और सामाजिक कर्म, दोनों ही मानवीय मूल्यों, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की भावना से प्रेरित हैं। वे अपने अनुभवों, विचारों और संवेदनाओं के माध्यम से समाज को एक अधिक जागरूक, संवेदनशील और न्यायपूर्ण दिशा में ले जाने का सतत प्रयास करते हैं।  उनका पत्राचार पता – रमा भवन, रमना रोड, गया – ८२३००१, बिहार , ईमेल - pankaj.bhu11@gmail.com

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