प्रस्तुत गीत संग्रह ‘‘मेरे मन के वीराने में‘‘ गीतों केी भाव प्रवण संचेतना का सुन्दर-सा सुमनगुच्छ है जिसे पढ़कर पाठकों की चेतना विभिन्न भावुक सुरभित वीथियों में विचरण करने को विवश होती रहेगी ‘मन के वीराने में‘ भी अनेक सुरभित पुष्पित पल्लवित गीत वाटिकाएँ पाठकों को आनन्द विभोर कर देंगी, ऐसा मेरा विश्वास है। कुछ गीत नैतिक और चारित्रक चेतना को उन्नत करने की प्रेरणा के प्रखर दस्तावेज हैं। कवि की सम्वेदना केवल जीवन के किसी पक्ष विशेष की बन्दी नहीं है, उसने देश के शत्रुओं को भी ललकारा है तो आस्था आयामों को भी आदर से नमन किया है। यह बहुआयामी और इन्द्रधनुशी गीत संग्रह “मेरे मन के वीराने में’’ पाठकों को वीराने में विचरण हेतु छोड़कर नहीं भागता, बल्कि शब्द और भावों के सुरभित आनन्द कानन में विहार कराता है।