‘मृगतृष्णा’ का जैसा अर्थ है अधिकतर वैसी ही कविताएं इस काव्य-संग्रह में संकलित की गई हैं। वास्तव में इस संसार में लगभग सब कुछ एक समय के पश्चात समाप्त हो जाता है। इस काव्य-संग्रह में कवि ने उसी क्षणिक भाव का वर्णन करने का प्रयास किया है जहाँ से जल स्वरूपी खुशियां इस जीवन के मरुस्थल में प्रतीत होती हैं लेकिन अगले ही क्षण वास्तिकता का ज्ञान हो जाता है।
कवि ने प्रकृति के प्रति अपने प्रेम को दर्शाने का असीम प्रयास किया है। इन रचनाओं में प्रकृति का सौन्दर्य और हमारे आस-पास ही होने वाली गतिविधियों में कितना सौन्दर्य छिपा है ये देखने को मिलता है।