“मुक्तिदाता “यह एक ऐसे नौजवान समर यादव की कहानी है जो भारत के एक छोटे से शहर में रहता है जिसका बचपन घोर गरीबी में बीतता है और जहां जातिगत भेदभाव और प्रताड़ना का उसे शिकार होना पड़ता है | उसके माता-पिता ग्वाले हैं | पिता की आकस्मिक मौत के पश्चात घर संभालने की जिम्मेदारी बचपन से ही उसके कंधे पर आ जाती है | पर वह हिम्मत नहीं हारता है |इसके पहले तक वह अपनी कक्षा में सबसे पिछली बेंच पर बैठने वाला विद्यार्थी था परंतु 10 वीं कक्षा में प्रथम आते ही कक्षा के अन्य विद्यार्थियों की नजरों में उसका सम्मान बढ़ जाता है |उसे प्रेरणा मिलती है की सिर्फ दूध बेंचने से समाज में प्रतिष्ठा नहीं मिलेगी | इसके लिए उसे अच्छी शिक्षा लेनी होगी |वह बी एस एफ में अफसर बन जाता है| उसे उच्च ब्राह्मण जाति की लड़की सपना प्यार करने लगती है पर उसकी शादी एक दुष्ट ब्राह्मण से हो जाती है| समर उसे उसके दुष्ट पति के चंगुल से बचाता है | इसी बीच समर की तैनाती कश्मीर में हो जाती है | वहाँ एक कश्मीरी लड़की अनामिका पंडित उससे प्यार करने लगती है पर उसका अपहरण हो जाता है |समर उसे भी बचाता है | यह प्रेम ,संघर्ष , आशा, निराशा , रहस्य और रोमांच से भरी हुई कहानी है |