परिवार को चलाने में पति-पत्नी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है | संयुक्त परिवार का टूटना अवश्यंभावी है| इस सत्य को पहचान कर सबसे पहले अपनी पत्नी और संतान की देखभाल सही तरीके से करना चाहिए | अपनी संतान को उचित शिक्षा और संस्कार देना चाहिए |तत्पश्चात माता-पिता का सहारा बनना चाहिए | भाई बहनों को सहयोग अवश्य करना चाहिए पर उनकी परवरिश की जिम्मेदारी माता -पिता की होती है न कि किसी अन्य सदस्य की | यदि कोई भी व्यक्ति हमारे जीवन को सवाँरने में योगदान देता है तो उसका एहसान हमें जरूर चुकाना चाहिए | वरना एहसान फ़रामोशी भी इंसान को स्वार्थी और एकाकी बना देती है | जो सुख देने में है वह लेने में नहीं |साथ ही किसी दूसरे का भला करते समय हमे प्रतिदान की आशा भी नहीं करनी चाहिए वरना यही हमारे दु:ख का कारण बनता है |
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