शब्द शक्ति – लोक माता लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के जीवन, दर्शन और शासन-दृष्टि पर आधारित एक विचारप्रधान पुस्तक है, जो इतिहास को केवल घटनाओं के क्रम में नहीं, बल्कि चेतना और नीति के रूप में प्रस्तुत करती है। चोंडी गाँव की एक साधारण बालिका से लेकर मालवा की लोकमाता बनने तक की यात्रा में यह पुस्तक दिखाती है कि कैसे अहिल्याबाई ने व्यक्तिगत दुःख, सामाजिक रूढ़ियों और सत्ता की चुनौतियों को शब्द, सत्य और करुणा की शक्ति से रूपांतरित किया। सती प्रथा का अस्वीकार, न्याय में निष्पक्षता, अकाल में लोककल्याण, बुनकरों और कारीगरों का आर्थिक सशक्तिकरण तथा भारत भर में सांस्कृतिक पुनर्जागरण ये सभी प्रसंग उनके उस शासन दर्शन को उजागर करते हैं जिसमें राजा स्वयं को प्रजा का सेवक मानता है। यह पुस्तक सिद्ध करती है कि सच्ची शक्ति तलवार में नहीं, बल्कि नीति, शब्द और विवेक में होती है, और अहिल्याबाई होलकर केवल एक शासिका नहीं, बल्कि लोकचेतना की अमर प्रतीक हैं।
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