मुरझाए धूप से जो वो गुल नहीं है हम
कह दो कि आफताब से औकात में रहे।
मैने दैनन्दिन की अनुभूतियों,भावनाओं,प्रकृति का आशिर्वाद, प्रकोप आदि को अपने गीतों व गजलों के रूप में द्रवित हृदय से प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।
मुझे पूरी उम्मीद है कि आप मेरी पुस्तक तलाशे वफा भाग 1 को अपने हृदय की गहराईयों से आत्मसात करेंगे जिससे भविष्य में मुझे तलाशे वफा भाग 2 प्रकाशित करने का सम्बल प्राप्त हो सके।