सिद्धार्थ एक पुलिस अधिकारी है। बारामूला में आतंकवादियों से लड़ने के बाद उसकी पोस्टिंग राजनगर में कर दी जाती है। वहां एक हिंसावादी संगठन काला-दस्ता की हुकूमत चलती है। यह संगठन रंगदारी वसूल करता है और लोगों के हित में काम करने का दिखावा करता है। असल में वह लोगों में दहशत और डर फैलाता है। राजनगर का कोई भी निवासी इस संगठन की बात टालने की हिम्मत नहीं करता है। अब सिद्धार्थ के सामने चुनौती होती है काला दस्ता को ख़त्म करने की।
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