विवाह कानून भारतीय कानूनी व्यवस्था का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। विवाह जीवन का एक दीर्घकालिक और गहरा बंधन है — और जब यह बंधन टूटने की कगार पर आ जाता है, तो अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी होना अनिवार्य हो जाता है।
यह पुस्तक भारतीय विवाह कानूनों को सरल और सुलभ भाषा में प्रस्तुत करती है, ताकि कानून की जानकारी न रखने वाले आम पाठक भी इसे आसानी से समझ सकें।
इस पुस्तक में क्या है
इस पुस्तक में हिंदू विवाह अधिनियम 1955 और विशेष विवाह अधिनियम 1954 के अंतर्गत वैध विवाह की शर्तें, विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया, और शून्य तथा अमान्यकरणीय विवाह के बीच कानूनी अंतर को स्पष्ट रूप से समझाया गया है। तलाक के सभी प्रमुख आधार — व्यभिचार, क्रूरता, परित्याग, मानसिक विकार आदि — सरल उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किए गए हैं। आपसी सहमति से तलाक और विवादित तलाक की प्रक्रिया, न्यायिक अलगाव, और दाम्पत्य अधिकारों की पुनर्स्थापना जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। इसके अतिरिक्त, सिज़ोफ्रेनिया और मानसिक विकार, मानसिक क्रूरता, अधिवास एवं संपत्ति विभाजन, स्त्रीधन, तथा धारा 498a और घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुख न्यायालयीन निर्णयों के साथ समझाया गया है।
चाहे आप विवाह की तैयारी कर रहे हों, किसी वैवाहिक विवाद का सामना कर रहे हों, या केवल अपने कानूनी अधिकारों को जानना चाहते हों — यह पुस्तक आपके लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका है।
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